वेदांता NCLT न्यूज़ अपडेट: सरकार और SEBI की आपत्तियों से डिमर्जर प्लान पर संकट, अगली सुनवाई 17 सितम्बर तक टली
भारत की दिग्गज खनन और धातु कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd.) आज फिर से सुर्खियों में है। 20 अगस्त 2025 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में वेदांता के डिमर्जर प्रस्ताव पर सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार और सेबी (SEBI) दोनों ने गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। यही कारण है कि इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 सितम्बर 2025 को होगी। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद, निवेशकों पर असर और आगे की संभावनाओं के बारे में विस्तार से—
वेदांता का डिमर्जर प्लान क्या है?
सितम्बर 2023 में वेदांता लिमिटेड ने अपने बिज़नेस को अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित (Demerger) करने की योजना बनाई थी। कंपनी का लक्ष्य है कि हर मुख्य सेगमेंट को स्वतंत्र सूचीबद्ध कंपनी बनाया जाए। इसके तहत—
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अल्युमिनियम (Aluminium)
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तेल एवं गैस (Oil & Gas)
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पावर (Power)
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बेस मेटल्स (Base Metals)
को अलग-अलग कंपनियों के रूप में शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध किया जाएगा।
वेदांता का मानना है कि इस कदम से निवेशकों को बेहतर वैल्यू अनलॉक होगी और हर सेगमेंट पर फोकस्ड ग्रोथ संभव होगी।
सरकार और SEBI की आपत्तियाँ
1. पेट्रोलियम मंत्रालय की आपत्ति
भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने NCLT में वेदांता के डिमर्जर प्लान का विरोध किया है। मंत्रालय का आरोप है कि कंपनी ने—
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कुछ देयताओं (Liabilities) को छिपाने की कोशिश की है।
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राजस्व (Revenues) को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।
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डिमर्जर के बाद सरकार के बकाया वसूली में बाधा आ सकती है।
2. SEBI की आपत्ति
स्टॉक मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। SEBI का कहना है कि—
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वेदांता ने सेबी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेने के बाद अपने डिमर्जर स्कीम में बदलाव किए।
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यह एक गंभीर उल्लंघन (Serious Breach) है।
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इस पर कंपनी के बोर्ड को औपचारिक चेतावनी जारी की गई है।
NCLT में आज की सुनवाई और फैसला
20 अगस्त को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। लेकिन आपत्तियों की गंभीरता को देखते हुए NCLT ने अगली सुनवाई की तारीख 17 सितम्बर 2025 तय कर दी है।
यानी फिलहाल डिमर्जर का रास्ता और मुश्किल हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट से झटका – तलवंडी साबो केस
वेदांता को एक और बड़ा झटका सुप्रीम कोर्ट से भी मिला है।
कंपनी ने तलवंडी साबो पावर प्रोजेक्ट से जुड़े "डीम्ड एक्सपोर्ट" लाभ के तहत अतिरिक्त मुआवजे की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता की यह अपील खारिज कर दी।
इससे कंपनी की वित्तीय उम्मीदों को नुकसान पहुँचा है और निवेशकों का भरोसा भी थोड़ा कमजोर हुआ है।
शेयर बाज़ार पर असर
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सुनवाई और आपत्तियों की खबर के बाद वेदांता के शेयर 2% से अधिक गिर गए।
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निवेशक डिमर्जर के भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
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शॉर्ट टर्म में वेदांता के शेयर में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
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लॉन्ग टर्म निवेशक (Long Term Investors):
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अगर आप लंबे समय के लिए निवेशक हैं तो घबराने की ज़रूरत नहीं है।
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डिमर्जर से वैल्यू क्रिएशन हो सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा।
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शॉर्ट टर्म निवेशक (Short Term Traders):
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अगले एक महीने तक शेयर में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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NCLT की अगली सुनवाई (17 सितम्बर) तक मार्केट सेंटिमेंट नकारात्मक रह सकता है।
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सेक्टर पर असर:
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वेदांता का डिमर्जर मेटल, माइनिंग और एनर्जी सेक्टर में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।
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सरकार और सेबी के विरोध से अन्य कंपनियों के लिए भी रेगुलेटरी सख्ती बढ़ सकती है।
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आगे की राह
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17 सितम्बर 2025 को NCLT की अगली सुनवाई इस मामले का टर्निंग प्वॉइंट होगी।
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अगर कंपनी आपत्तियों का संतोषजनक जवाब देने में सफल रही तो डिमर्जर की राह साफ हो सकती है।
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लेकिन अगर आपत्तियाँ बनी रहीं तो कंपनी की योजना को बड़ा झटका लग सकता है।
निष्कर्ष
वेदांता का डिमर्जर प्लान भारतीय कॉरपोरेट इतिहास की बड़ी घटनाओं में से एक हो सकता है। लेकिन सरकार और SEBI की आपत्तियों ने इसे फिलहाल रोक दिया है।
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निवेशकों के लिए संदेश:
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जल्दबाज़ी में फैसले न लें।
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कंपनी के वित्तीय परिणाम, अगली NCLT सुनवाई और रेगुलेटरी अपडेट पर नज़र बनाए रखें।
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यह मामला आने वाले महीनों में वेदांता के शेयर और मेटल सेक्टर की दिशा तय करेगा।
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👉 कुल मिलाकर, 20 अगस्त 2025 का दिन वेदांता और उसके निवेशकों के लिए मिश्रित रहा।
अब सबकी नज़रें 17 सितम्बर की सुनवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि डिमर्जर आगे बढ़ेगा या रुक जाएगा।
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